The Masaledaani Poem by Kamini Agarwal

by on October 9, 2019

When I interviewed Kamini Agarwal in 2017, she said, “I want to see my poems in a book.” When elders share their bucket list with me, I feel excited at their zest for life. But it is even more exciting to see their dreams come true. Kamini Agarwal’s daughter Anuradha gifted her mom a book of her poems last year on her golden anniversary.
 
A social worker, poetess, performer, gracious hostess, and talented cook – Kaminiji is all of these and much more. To know more about her, click here
 
Today is Kaminiji’s birthday and I take the pleasure of sharing a soulful kitchen poem from her poetry collection. What makes this poem extra special is that it is inspired by the masala dabba (also known as hatadi or masaledaani) which has always held intrigue. This Indian spice container rules our kitchens, even though across regions, the ingredients in it may vary. Jigyasa and myself have spoken about this container at the London Book Fair where we explained how it is a must for Indian cooking. During my visit to Jaipur, I saw Chef Sameer Gupta using four hatadis, which added speed and efficiency to his cooking style.
 

||सुनिए दिल की कहानी – कामिनी अग्रवाल||

 

मेरा दिल है इक मसालदानी
इसकी भी है एक दिलचस्प कहानी
मेरी बात सुन, आप शायद मुस्कुरायें
दिल पे हाथ रख कर देखिए
वहाँ वैसी ही
हिस्सों में बटी मसालदानी पाएंगे
 
सुनिए है ये सच
नहीं है झूठी कहानी
कि मेरा दिल है एक मसालदानी
 
किसी में तेज मिर्च जैसी यादें
जो याद आते ही आंखों में आंसू ला दे
कहीं है गर्म मसाला चटाखेदार
जिन्हें सोच जीवन होता लज्जतदार
पर कहीं है हल्दी सिर्फ रंगवाली
जीवन को जो दे अजीब सी लाली
 
नमक है बादशाह उस मसालदानी का
जो है सहायक जीवन के हर पहलू का
जीरा, अजवायन, मेथी हो या धनिया
कभी कभी इनसे हम चलायें दिल की दुनिया
जैसा रंग वैसा ढंग हमारे जीवन ने अपनाया
जब पड़ी ज़रूरत जिसकी, उसे जीवन में मिलाया
 
ये माना कभी कभी मिर्च की कड़वाहट बढ़ जाती है
पल पल दिल भर आता है, जोरों से रुलाई आती है
पर ऐसे में एक चम्मच चीनी का खा लेती हूँ
उमड़ते हुए आंसुओं पर काबू पा लेती हूँ
 
मैंने न जाने कब से ये रवैया अपना रखा है
क्योंकि मसालदानी में एक खाना चीनी का भी बना रखा है
जिससे चीनी खाके अपने आस पास
साथियों में मिठास घोल सकूँ
और अपनी आँखों में आई तल्ख़ी को छिपा सकूँ
 

बस अब और क्या कहूँ यही मेरी कहानी है
कि मेरा दिल एक मसालदानी है।

 
 

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