अनन्य सखा

Hindi poem by Pratibha Jain

  पीछे मुड़कर देखो तो ज़ाहिर है कि सबसे गहरा नाता तो ‘शब्द’ के साथ ही जोड़ा है. और कोई साथ रहे न रहे, शब्द तो रहता ही है. चाहने वाले नाराज़ हो सकते हैं, दोस्त वक्त पर गायब हो […]

{ 0 comments }

Read More...