Jeevan Saagar ~ जीवन सागर

by on January 23, 2012

 

jeevan saagar

सागर की लहरें अनगिनत
मतवाली नखराली बाँवरी लहरें
एक साथ बहती साथ ही उछलती
मैं तट पर पलकें बिछाकर
स्वागत में खड़ी बाट जोवती
लहरें भी कूदती खिलखिलाती
अपने ही सुर साज में मटकती
मुझे छूकर छेड़कर लौट जाती
मेरे विवश तन पर
उनके स्पर्श की नमी है
मिटटी की उबटन है
मेरे विकल मन पर
उनकी सांसों की छाप है
उनकी गूँज की शहनाई है
विरह और मिलन का गीत
यह अनंत आंखमिचौनी
जीवन का उपहार है
सांसों का आधार है

 

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