Arham Garbhasadhana (Hindi) ~ Experiencing Divinity in Pregnancy

इस पुस्तक में: जन्म और पुनर्जन्म का रहस्य > स्वप्न साधना द्वारा दिव्य संतति का आह्वान > सशक्त मातृत्व एवं पितृत्व की साधना > माँ द्वारा गर्भस्थ जीव का कल्याण एवं उत्कर्ष > गर्भ में जीव का स्वागत > एक सुखद गर्भावस्था की साधना > प्रत्येक क्षण में दिव्यता का संचार > एक सफल एवं सम्यक् जीवनशैली की प्रेरणा > अर्हम् गर्भसाधना के शिक्षक एवं साधक के अनुभवों की झलक
Arham Garbhasadhana - Divinity in pregnancy

Compiled and Written by Pratibha Jain


Specifications

150 पृष्ठ की सुंदर मल्टीकलर पुस्तक
प्रवक्ता – उपाध्याय श्री प्रवीण ऋषिजी ॥ संकलन एवं सम्पादन – डॉ प्रतिभा जैन, चैन्नई
डिजाइन – बी. अनिता, नई दिल्ली एवं कविता शिवन, लंदन
चित्रकारिता – एलीस कोलेट सोराविटो, पेरिस
ध्यानचित्र – आनंद तीर्थ ॥ गुरुदेव के फोटो – श्रीवत्स शांडलिया, बैंगलोर
प्रथम संस्करण दिसम्बर 2012 ॥ प्रकाशक आनंद तीर्थ केंद्रीय प्रतिष्ठान

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Introduction

क्या माँ गर्भस्थ शिशु की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक बना सकती है? क्या माँ गर्भस्थ शिशु के पिछले पापकर्मों के अशुभ परिणाम को शुभ भाव में परिवर्तित कर सकती है? क्या गर्भावस्था में ऐसे चमत्कार संभव है? आगम के सिद्धांत हैं – हाँ, ऐसा संभव है, बिना चमत्कार के, बिना वरदान के। इन सिद्धांतों के आधार पर कुछ प्रयोग हुए हैं जिनसे गर्भसंस्कार साधना की एक प्रामाणिक प्रक्रिया आज हमारे समक्ष प्रस्तुत है। इन प्रयोगों का आधार यही है कि माँ एक सृजनहार ही नहीं, कल्याणप्रदायिनी भी है। उसमें सिर्फ जन्म देने की क्षमता ही नहीं, जीवनकला देने की शक्ति भी है।
माता-पिता और संतान के बीच एक आह्लादपूर्ण संबंध प्रस्थापित करना, गर्भधारण के पूर्व से ही इस रिश्ते का शिवद और सुखद एहसास करना, और मानव जन्म की दैविक अनुभूति ही अर्हम् गर्भसाधना का उद्देश्य है।
यदि नर और नारी, संतति का निर्णय लेने से पूर्व ही अपना दायित्व और अपना प्रयोजन अच्छी तरह समझ लें, तो उन्हें उस आनंद की प्राप्ति हो सकती है जो सिद्धार्थ और त्रिशला को हुई, नंद और यशोदा को हुई, जो उन माता-पिता को मिली है जिन्होंने इस विश्व को नर-रत्नों का वरदान दिया। अर्हम् गर्भसाधना में माता-पिता दोनों का विशिष्ट स्थान है। जो उत्तम जनक-जननी बनने के इच्छुक हैं, उनके लिए यह एक परिपूर्ण साधना का कार्यक्रम है। दोनों को दायित्व निभाना है, दोनों को साधना करनी है, दोनों को इस स्वप्न में साथ जीना है।
इस प्रक्रिया के मुख्य आयाम हैं – ध्यान साधना, स्वस्थ आहार, विवेकपूर्ण व्यवहार और दिव्य संबंध। प्रक्रिया सहज और सरल है, परिणाम समग्र और श्रेष्ठतम हैं। तन, मन एवं वाणी में स्वस्थता एवं संतुलन का वातावरण लाने की क्षमता अर्हम्‌ गर्भसाधना में है।

Page of Content

आमुख

गुरुदेव के साथ एक अक्षर यात्रा
आभार अभिव्यक्ति
स्वागत युगपुरुष का
दिव्य संतति की कामना
स्वप्न एक दिव्य वरदान

मुख्य अध्याय

1) जन्म का निर्णय 2) पारिवारिक त्रिकोण
3) पूर्व तैयारी 4) लेश्या 5) स्वप्न शक्ति
6) रंग विज्ञान 7) श्वास की डोर
8) प्रभात की वेला 9) अतिविशिष्टता की साधना
10) साधना का अंतर्संबंधित स्वरूप 11) दो जन्मों के बीच
12) सम्यक्‌ जीवनशैली 13) प्रसव पश्चात्
14) गर्भवती माँ का सुख बढ़ाएँ 15) साधना की समग्र अनुभूति

साधना के आयाम

1) सम्पुष्ट साधना 2) स्वप्न साधना
3) रंग साधना 4) स्वर को पहचानिए
5) गर्भधारण और श्वास प्रक्रिया 6) गर्भधारण की साधना
7) नमोत्थुणं की साधना 8) साधना की क्रमबद्धता
9) स्वस्तिक श्रीवत्स की साधना 10) ऐसे बदले आहार की ऊर्जा
11) रुदन का संक्रमण 12) आहार साधना
13) पंच परमेष्ठी मुद्रा 14) दूध पिलाने की साधना

कंठस्थ करें

नवकार मंत्र
बधाई के शब्द
नमोत्थुणं मंत्र
दूध पिलाने का मंत्र

Author and Compiler

प्रवक्ता – उपाध्याय श्री प्रवीण ऋषि

उपाध्याय श्री प्रवीण ऋषि पिछले तीन दशकों से जैन आगमों पर चिंतन एवं मनन कर रहे हैं। उनके प्रवचन प्रेरणादायक हैं एवं साधक को जिज्ञासु बनने की दिशा देते हैं। धार्मिक तत्वों और सिद्धांतों से जीवन को सम्पन्न करने के लिए उन्होंने कई नए प्रयोग एवं कार्यक्रमों का सृजन किया है जिनमें से एक है अर्हम्‌ गर्भसाधना। इसमें रिश्ते, जीवन-लक्ष्य, पुनर्जन्म, लेश्या, ध्यान-साधना और सम्यक्‌ जीवनशैली जैसे अनेक विषयों पर उनकी प्रबुद्धता दृष्टिगोचर होती है। आप एक प्रख्यात जैन मुनि हैं और पैदल पथ विहारी हैं।

संकलनकर्ता – डॉ प्रतिभा जैन

डॉ प्रतिभा जैन ने मद्रास विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद से 2001-04 तक रिसर्च फेलोशिप मिली है। उनकी दो सह-लिखित व्यंजन पुस्तकों को कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने लंदन, पेरिस एवं इटली के पुस्तक मेलों में भारतीय आहार पद्धति पर प्रस्तुतिकरण किए हैं। वे हिंदी एवं अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लेखक एवं अनुवादक हैं और चैन्नई में रहती हैं।

Gallery

Arham Garbhasadhana inner pages 30 &31

Arham Garbhasadhana inner pages 140 &141

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